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कठपुतली कॉलोनी में डी.डी.ए. का आतंक – पुलिस बल पर लोगों को तोड़ने और उन्हें उजाड़ने की साजिश

 
लोगों के एकता, लगातार संघर्ष और विरोध के बावजूद डी.डी.ए. कर रहा कठपुतली कॉलोनी की शांति और समृद्धि को भंग – आपस में लड़ाई करवाने की साज़िश करती डी.डी.ए. की अधिकारी
जनवरी 02, 2017 | कठपुतली कॉलोनी : आज कठपुतली निवासियों के संघर्ष को एक हफ्ते से ज्यादा हो रहा है, जब सारे निवासी, समुदाय के लोग डी.डी.ए. के अधिकारियों, ज्यादा संख्या में मौजूद पुलिस बल, वहां अवांछित बुलडोज़र का विरोध करते आ रहे है। दिनांक 25 दिसम्बर को हुए प्रेस वार्ता के बाद हर रोज शाम के 4 बजे लोग अपनी सभा करते आ रहे है और पूरे कॉलोनी में हो रहे अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाते आ रहे हैं और एक दुसरे को ताकत दे रहे है, डी.डी.ए. और पुलिस के अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने में और ऐसे समय में पूरे गाँव की एकता और शान्ति बनाये रखने के लिए। पिछले 7 दिनों से हर दिन हर दल और आन्दोलन के प्रमुख नेता वहां पहुँच कर कठपुलती वासियों के समर्थन में उनके संघर्ष के साथ खड़े हुए है और लगातार इस मुद्दे और अन्याय के खिलाफ लोगों के साथ खड़े हैं। इनमें कृष्णा प्रसाद (भूमि अधिकार आन्दोलन, अखिल भारतीय किसान सभा), बृंदा करात (सीपीआईएम), गिरिजा पाठक (सीपीआई – एमएल), एनी राजा (नेशनल फेडरेशन ऑफ़ इंडियन वीमेन), प्रो. आनंद कुमार (स्वराज अभियान), भूपेंद्र सिंह रावत, विमल भाई, राजेन्द्र रवि, नान्हू प्रसाद (जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय – एनएपीएम), प्रभु दयाल (बलजीत नगर), प्रिया पिल्लई (सीनियर सामाजिक कार्यकर्ता), आशा शर्मा, मैमुना, संतोष (महिला जनवादी समिति), नत्थू प्रसाद, अजय, गुलजार (सीपीआईएम), नीलगगन, गोविन्द (डीवाईएफआई), शशि भूषण (एआईकेएमएम), सुनीता (डोमेस्टिक वर्कर्स यूनियन) व अन्य संगठन के साथ कई विश्व विद्यालय जैसे आंबेडकर यूनिवर्सिटी, जवाहरलाल यूनिवर्सिटी, टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान, गुवाहाटी व अन्य के छात्र और युवा शामिल हुए और अपना पूरा समर्थन कठपुतली वासियों के संघर्ष और एकता को देने की बात कही।
 
दिनांक 25 दिसम्बर 2016 के दिन प्रेस वार्ता के शुरू होते ही जिस तरीके से बिना लोगों को बताये DMRC की दीवार तोड़कर लोगों के अन्दर भय पैदा करना चाहते थे और पूरे कॉलोनी में अशांति बनाना चाहते थे, उसमें विफल होने के बाद डी.डी.ए. लगातार अलग अलग हथकंडे अपना रही है, जैसे लोगों के साफ़ मना कर देने के बावजूद बार बार घर जाकर डेमोलिशन स्लिप (पर्ची) कटवाने के लिए मानसिक दवाब बनाना। बार-बार जन सभा के स्थल पर पुलिस बल के साथ आकर सभा ना होने देने की कोशिश करना, माइक, साउंड सिस्टम का उपयोग ना होने देना व कई अन्य तरीकें। इसके बाद भी लोगों में अटूट एकता बनी हुई है, लोग शांति से उनकी बात सुनकर जब उनसे सवाल करते है तो डी.डी.ए. के अधिकारी तरह तरह का बहाना बना कर उन्हें सिर्फ ट्रांजिट कैंप भेजने में लग जाते है, जो कि साफ़ तौर पर उनके मर्जी के खिलाफ और अमानवीय है। लोगों के पास संवैधानिक हक है अपने विकास की नीति निर्धारित करने का। अपनी ज़िन्दगी जीने का हक, वो भी बिना किसी पुलिस के भय, और डी.डी.ए. के हस्तक्षेप के।
 
कठपुतली कॉलोनी के निवासियों की जनतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों का हम खुले तौर पर समर्थन करते है और जिसमें उनकी प्रमुख मांग निम्न हैं :
 
–    पुलिस बल और बुलडोज़र तुरंत कठपुतली कॉलोनी से बाहर जाए।
 
–    पुलिस बल डी.डी.ए. के अधिकारिओं के साथ घूमना और घरों के अन्दर घुसना बंद करें।
 
–    डी.डी.ए. पूरे कॉलोनी में जबरन गैरकानूनी तरीके से दवाब बनाकर पर्ची काटना बंद करें।
 
–    इसके साथ डी.डी.ए. के अधिकारी कठपुतली निवासियों के रहते हुए एक भी घर (चाहे उसकी पर्ची कटी हो या नहीं), सार्वजनिक उपयोग के भवन, शौचालय, और अन्य किसी भी स्थापित भवनों को एक एक करके तोड़ना बंद करें और पूरी कठपुतली निवासियों के सहमति का इंतज़ार करें।
 
–    DUSIB तुरंत कार्यवाही करते हुए अभी तक (वर्ष 2017 तक) के रहने वाले सभी निवासियों की सूची बनाये और लोगों के सामने जन सभा में जगजाहिर करें और अपने वेबसाइट पर भी उपलब्ध करवाएं।

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Comment (1)

  1. K SHESHU BABU

    Saajish ko samjhoo ! Miljul kar sangharsh karo!
    Katputli logon ko baahar karoo!

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