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चुटका में तीसरी बार जन-सुनवाई की नौटंकी: परमाणु ऊर्जा कारपोरेशन पिछली फजीहत के बाद भी मक्कारी की मुद्रा में

Posted by संघर्ष संवाद on बुधवार, फ़रवरी 12, 2014 | 0 टिप्पणियाँ

चुटका परमाणु संयंत्र के विरोध में जबलपुर के समर्थक समूह द्वारा
सिविक सेन्टर गार्डन में 15 फरवरी, 2014 को धरना दिया जावेगा।
मानेगांव (नारायणगंज, मण्डला) स्थित जनसुनवाई स्थल के पास
15 फरवरी, 2014 से चुटका परमाणु संघर्ष समिति द्वारा अनिश्चितकालीन धरना प्रारंभ होगा

चुटका परमाणु विद्युत परियोजना पर जन-सुनवाई 17 फरवरी 2014 को मानेगांव, जिला-मण्डला में आयोजित की गई है। उल्लेखनीय है कि इसके पूर्व 24 मई, 2013 और 31 जुलाई, 2013  को भी शासन द्वारा यह प्रयास किये जा चुके है किन्तु इस परियोजना के प्रभावितों एवं इनके समर्थक समूहों द्वारा किये गये जबरदस्त प्रतिरोध के चलते उक्त जन-सुनवाईयों को निरस्त करना पड़ा था।  

चुटका परमाणु संयंत्र परियोजना 
जन-सुनवाई 17 फरवरी, 2014 

साथियों,
हमें एक बार फिर अपनी पूर्ण ऊर्जा एवं जोश के साथ इस परियोजना के खिलाफ खड़े होना है। चुटका, टांटीघाट और कुंडा सहित आसपास के ग्रामीण, आदिवासी समाज के हक में हम अपनी सारी शक्ति एकत्रित कर आवाज बुलंद करे जिससे ये विनाशकारी परियोजना ना सिर्फ इस क्षेत्र में आने पाये वरन् सरकार ऐसी परियोजनाओं के कार्यान्वयन के पहले पुनर्विचार करें।
आशा है आप स्वयं एवं अपने साथियों सहित जन-सुनवाई के पूर्व इस परियोजना के खिलाफ संघर्ष में एकजुटता के साथ अपनी सहभागिता द्वारा स्थानीय ग्रामीण, आदिवासियों के हौसले बुलंद करेंगे।
चुटका परमाणु संयंत्र के विरोध में जबलपुर के समर्थक समूह द्वारा सिविक सेन्टर गार्डन में15 फरवरी, 2014 को धरना दिया जावेगा।
मानेगांव (नारायणगंज, मण्डला) स्थित जनसुनवाई स्थल के पास 15 फरवरी, 2014 से चुटका परमाणु संघर्ष समिति द्वारा अनिश्चितकालीन धरना प्रारंभ होगा ।
राजकुमार सिन्हा (09424385139) नवरतन दुबे (09691375233)
अनिल कर्णे (09425384555)

चुटका परमाणु संघर्ष समिति ने यह स्पष्ट निश्चय जाहिर किया कि अगर सरकार जनता के खिलाफ अपनी मनमानी पर अड़ी है तो जनता के हौसले भी कम नही हुए हैं। इस बार भी इस झूठी सुनवाई का जबरदस्त विरोध जनता करेगी और सरकार को पीछे हटना पड़ेगा। पेश हैं चुटका परमाणु संघर्ष समिति की प्रेस विज्ञप्ति;

जबलपुर। न्यूक्लियर पावर कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित चुटका मध्यप्रदेश परमाणु विद्युत परियोजना की पर्यावरणीय प्रभाव आंकलन रिपोर्ट पर मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 17 फरवरी, 2014 को मानेगांव, नारायणगंज, मण्डला में जनसुनवाई रखे जाने बाबद् आम सूचना दैनिक समाचार पत्र ‘‘पत्रिका’’, जबलपुर दिनाँक: 11/01/2014 में प्रकाशित की गई है। इस परियोजना से चुटका, टाटीघाट एवं कुण्डा सहित आसपास के 54 गांव प्रभावित होंगे और क्षेत्र के ग्रामीण, आदिवासियों के नैसर्गिक अधिकारों सहित पर्यावरण और जैव-विविधता पर हानिकारक प्रभाव पड़ेंगे। परियोजना से प्रभावित गांव के निवासियों की ओर से इस परियोजना के विरोध में निम्न आपत्ति के साथ परियोजना पर तत्काल रोक लगाने का हम आह्वान करते हैं।

  1. परियोजना से प्रभावित ग्रामवासी बरगी बांध परियोजना से एक बार विस्थापित हो चुके हैं। मध्यप्रदेश राज्य की आदर्श पुनर्वास नीति-2002 में बार-बार विस्थापन पर रोक लगाने संबंधी प्रावधान है। चूंकि ग्रामवासी एक बार पहले विस्थापित हो चुके हैं और यदि यह परमाणु विद्युत परियोजना लगाई जाती है तो दोबारा लोगों का विस्थापन होगा जो कि पुनर्वास नीति के प्रावधानों का उल्लंघन है।
  2. पुनर्वास नीति में यह प्रावधान है कि प्रभावित होने वाले व्यक्ति को परियोजना निर्माण के पूर्व पुनर्वास स्थल बताया जायेगा। उनकी सन्तुष्टी व सहमति के पश्चात ही परियोजना कार्य को आगे बढ़ाया जायेगा। परन्तु प्रभावितों को अभी तक परियोजना प्रबंधन द्वारा पुनर्वास स्थल नहीं बताया गया है। इसके बावजूद जनसुनवाई आयोजित करना व परियोजना कार्य को आगे बढ़ाना पुनर्वास नीति के प्रावधानों का खुला उल्लंघन है।
  3. परियोजना से प्रभावित होने वाले सभी गांव संविधान की पांचवीं अनुसूची के अन्तर्गत हैं। पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम-1996 (पेसा कानून) में विस्थापन के पूर्व ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य है। चुटका, कुण्डा और टाटीघाट की ग्रामसभाओं ने सर्वसम्मति से इस परियोजना का विरोध कर लिखित आपत्ति लगाई है अतः यह जन सुनवाई संवैधानिक प्रावधानों और पेसा कानून का उल्लंघन करके आयोजित की जा रही है।
  4. परमाणु संयंत्र में लगभग 7 करोड़ 25 लाख 76 हजार घनमीटर पानी प्रतिवर्ष नर्मदा की जलधारा से लिया जावेगा जो नदी में वापस नहीं होगा। इससे नर्मदा नदी के किनारे बसे सैकड़ों गांव जलाभाव से प्रभावित होंगे। मानव जीवन के लिए बिजली से अधिक उपयोगी पानी है। नर्मदा नदी में पानी के घट जाने से पर्यावरणीय संकट उत्पन्न होगा, अतः परियोजना जनहित विरोधी है।
  5. संयंत्र को ठण्डा करके जो पानी वापस बरगी जलाशय में छोड़ा जावेगा वह रेडियोधर्मी विकिरण युक्त होगा। रेडियोधर्मी पानी से जलाशय की मछलियां और वनस्पति प्रदूषित होंगे। उन्हें खाने वाले लोगों को केंसर, विकलांगता और अन्य बीमारियों का खतरा रहेगा। विकिरण से प्रदूषित नर्मदा जल पीने और नदी की मछलियों को खाने वालों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होंगी।
  6. परियोजना स्थल के बहुत दूर तक मत्स्याखेट पर प्रतिबंध लगने से हजारों मछुआरों की आजीविका का संकट उत्पन्न होगा। अतः यह परियोजना असंख्य लोगों के लिए संविधान के अनुच्छेद-21 में प्रदत्त इज्जत से जीने के अधिकार का उल्लंघन करेगी।
  7. प्रभावित गांववासियों ने अपने कुछ प्रतिनिधियों को रावतभाटा एवं अन्य परमाणु संयंत्र का भ्रमण करने के लिए भेजा था, जिससे पता चला कि संयंत्र के आसपास 12 किलोमीटर की परिधि में प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है। परियोजना से 35 कि.मी. तक की परिधि में केंसर, विकलांगता, नपुंसकता एवं पशुओं में गंभीर बीमारियां पाई गई। इस अनुभव के बाद चुटका परमाणु संयंत्र से होने वाली क्षति को रोकने परियोजना को रद्द किया जाना चाहिए।
  8. संयंत्र से निकलने वाली रेडियोधर्मी वाष्प का आसपास के 50 किलोमीटर क्षेत्र में फैलाव होगा। बरसात के साथ वह खेतों में गिरेगा। वहां उगने वाली फसल और चारा रेडियोधर्मी हो जावेंगे। उसे खाने वाले मनुष्य और पशु बीमार होंगे। इस प्रकार परियोजना लोकस्वास्थ्य और पर्यावरण विरोधी होने के कारण रद्द किये जाने योग्य है।
  9. परमाणु वैज्ञानिकों, समाचार-पत्र पत्रिकाओं एवं अध्ययनों से पता चला है कि परमाणु संयंत्र से निकलने वाला रेडियोधर्मी कचड़े का निस्तारण करने की सुरक्षित विधि विज्ञान के पास नहीं है। ऐसी दशा में 2.4 लाख वर्ष तक वह रेडियोधर्मी कचड़ा जैव विविधता को नुकसान पहुंचाता रहेगा, अतः इस दृष्टि से परियोजना रद्द की जानी चाहिए।
  10. सामान्य अनुभव है कि विद्युत परियोजनाओं के कारण आसपास के जंगल और जैव-विविधता नष्ट हो जाते हैं। चुटका के आसपास घने जंगल हैं जो नष्ट हो जावेंगे और पर्यावरण को अपूरणीय क्षति होगी, जिसकी भरपायी असंभव है, अतः परियोजना रद्द की जानी चाहिए।
  11. आपदा प्रबंध संस्थान (डी.एम.आई.), भोपाल द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में मध्यप्रदेश के भूकम्प संवेदी क्षेत्रों की सूची दी गई है। तद्नुसार मण्डला जिले की टिकरिया बस्ती के आसपास का क्षेत्र भूकम्प की दृष्टि से अतिसंवेदनशील बताया गया है। नीरी, नागपुर द्वारा चुटका मध्यप्रदेश परमाणु परियोजना पर तैयार पर्यावरणीय प्रभाव आंकलन रिपोर्ट में इस तथ्य को छुपाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई है अतः रिपोर्ट संदिग्ध है। वर्ष 1997 में नर्मदा किनारे के इस क्षेत्र में 6.4 रेक्टर स्केल का विनाशकारी भूकम्प आ चुका है ऐसी दशा में यहां परमाणु संयंत्र की स्थापना घातक है।
  12. ऐसा बताया जा रहा है कि भूकम्प संवेदी क्षेत्र में 7 रेक्टर स्केल का झटका सहने की क्षमता युक्त ढांचा तैयार किया जावेगा। यदि ऐसा होता है तो भी संयंत्र को संचालित करने वाली इलेक्ट्रॉनिक और कम्प्यूटर प्रणाली भूकम्प के कारण क्षतिग्रस्त होगी और संयंत्र को ठण्डा करने के लिए स्थापित प्रणाली फेल हो जावेगी जैसा कि फुकुशिमा (जापान) में देखा गया है। भूकम्प संवेदी क्षेत्र में प्रस्तावित चुटका परमाणु संयंत्र में भी भारी दुर्घटना अवश्यम्भावी है, ऐसी दशा में जबलपुर, सिवनी तथा मण्डला जिले की बहुत बड़ी आबादी परमाणु विकिरण का शिकार हो जावेगी और बाद में अनेक वर्षों तक पर्यावरण में इसका दुष्प्रभाव बना रहेगा।
  13. 700ग2 मेगावाट के चुटका में प्रस्तावित परमाणु परियोजना के डिजाइन का संयंत्र भारत में कहीं भी नहीं बना है और यह केनेडा और अमेरिका द्वारा भारत में निर्मित बहुत छोटे से संयंत्र का बड़ा रूप है। चूंकि इतना बड़ा संयंत्र प्रायोगिक तौर पर पहली बार निर्मित हो रहा है, इसकी विश्वसनीयता संदिग्ध है। लोग इस खतरे को सहने के लिए तैयार नहीं है।
  14. पूरे विश्व में अब परमाणु विद्युत परियोजनाएं बन्द की जा रही हैं क्योंकि ये पर्यावरण के लिए विनाशकारी हैं। वैकल्पिक ऊर्जा की ओर जब दुनिया कदम बढ़ा रही है तो भारत में परमाणु विद्युत संयंत्र कायम करना हास्यास्पद है।
  15. जिस समय चुटका परियोजना को योजना आयोग से मंजूरी मिली थी तब सौर ऊर्जा से बिजली पैदा करना महंगा होता था, आज स्थिति बदल गई है। अब सौर ऊर्जा परमाणु विद्युत से सस्ती पड़ती है। वर्तमान कीमतों पर वैकल्पिक ऊर्जा स्त्रोत का तुलनात्मक अध्ययन करने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि परमाणु ऊर्जा घातक, महंगी, स्वावलम्बन विरोधी और पर्यावरण विनाशक होने के कारण अन्य ऊर्जा स्त्रोतों से नुकसानप्रद है।

चुटका परमाणु संघर्ष समिति के साथ एकजुटता से संघर्षरत् जन संगठन:- जन संघर्ष मोर्चा, म.प्र.; भारतीय कम्पयुनिष्ट पार्टी, म.प्र.; गोंडवाना गणतंत्र पार्टी; गोंडवाना महासभा; भारत की कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी- लेनिनवादी, म.प्र.; पीपुल्स इनीशिएटिव अगेन्स्ट न्यूक्लियर पावर; आल इंडिया स्टूडेन्ट फेडरेशन; आल इंडिया यूथ फेडरेशन, म.प्र.; क्रांतिकारी नौजवान भारत सभा, म.प्र.; अखिल भारतीय क्रांतिकारी विद्यार्थी संगठन, म.प्र.; इंडिया अगेन्स्ट करप्शन; बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ; नेताजी सुभाष फाउन्डेशन, म.प्र इकाई; आजादी बचाओ आन्दोलन; भारत जन आन्दोलन; त्रिवेणी परिषद; नागरिक अधिकार मंच; जन पहल, म.प्र. आदि है।

विजय सेन    मीरा बाई     दयाल सिंह पुन्दे     नवरतन दुबे
(09981773205)            (09691375233)

– See more at: http://www.sangharshsamvad.org/2014/02/blog-post_12.html

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