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चुटका संयंत्र के खिलाफ लामबंद ग्रामीण

Tuesday, July 30, 2013

परमाणु संयंत्र का विरोध

मंडला | एजेंसी: मध्य प्रदेश के मंडला जिले में प्रस्तावित चुटका परमाणु विद्युत संयंत्र के खिलाफ आदिवासी बहुल इस जिले के ग्रामीण लामबंद हो गए हैं. साल 2009 में जब केंद्र सरकार ने इस परियोजना को आगे बढ़ाने की अनुमति दी तभी से ही ग्रामीणों ने अपना जन-जीवन नष्ट होने की आशंका के चलते इस संयंत्र का विरोध करना शुरु कर दिया था.

अब इन ग्रामीणों ने कहा है कि वे अपनी जान दे देंगे लेकिन परियोजना के लिए एक इंच भी जमीन नहीं देंगे. 31 जुलाई को होने वाली जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों के इस विरोध के और उग्र होने के आशंका हैं.

दरअसल परमाणु विद्युत निगम (एनपीसीआईएल) द्वारा 1400 मेगावाट का परमाणु बिजली संयंत्र चुटका में स्थापित किया जाना प्रस्तावित है. इसके लिए नारायणगंज तहसील में 497.73 हेक्टेयर जमीन को चिन्हित किया गया है. जमीन का अधिग्रहण राज्य सरकार की मदद से किया जाना है, मगर ग्रामीण किसी भी सूरत में जमीन देने को तैयार नहीं हैं.

नारायणगंज तहसील यानी कि जिस इलाके में संयंत्र स्थापित किया जाना है, वहां मूलतः गोंड जनजाति के लोग रहते हैं. चुटका परियोजना के कारण लगभग 54 गांवों की एक लाख आबादी के प्रभावित होने की आशंका है. 400 परिवार तो शुरुआती चरण में ही अपनी जमीन से बेदखल हो जाएंगे.

परियोजना का विरोध कर रहे लोगों में से एक प्रेम सिंह नरेथी का कहना है कि वह किसी भी कीमत पर परियोजना के लिए एक इंच भी जमीन नहीं देंगे. अगर जोर-जबर्दस्ती से जमीन ली जाती है तो वह आत्महत्या कर लेंगे.

नरेथी परिवार को 1984 में जबलपुर में नर्मदा नदी पर बने बरगी बांध के कारण अपनी जमीन छोड़नी पड़ी थी. तब इस परिवार के पास 80 एकड़ जमीन हुआ करती थी. आज लगभग आठ एकड़ जमीन है. विस्थापन का दंश झेल चुका यह परिवार अब दोबारा उसकी पुनरावृत्ति नहीं चाहता है.

जनजातीय वर्ग के लिए संघर्ष करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता गुलजार सिंह मरकाम का कहना है कि चुटका परियोजना से 2000 से ज्यादा मछुआरों के परिवार का जीवन भी संकट में पड़ जाएगा. इतना ही नहीं इस परियोजना के चलते विकिरण व अन्य पर्यावरणीय समस्याएं भी यहां के जनजातीय वर्ग को झेलनी पड़ेंगी. साथ ही, यहां की जैव विविधता भी प्रभावित होगी.

राज्य सरकार ने 31 जुलाई को जनसुनवाई का आयोजन किया है, मगर चुटका के आस-पास के लोगों ने इसका पुरजोर विरोध करने का ऐलान किया है. ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने उन्हें पर्यावरण पर प्रभाव संबंधी रिपोर्ट हिंदी में उपलब्ध नहीं कराई है.

जनसुनवाई के दौरान होने वाले संभावित विरोध पर पुलिस की खुफिया एजेंसी नजर रखे हुए है. इतना ही नहीं, आयोजन स्थल के अलावा आस-पास के गांवों में आने-जाने वालों पर भी नजर रखी जा रही है.

मंडला के जिलाधिकारी लोकश जाटव ने कहा कि 31 जुलाई को जनसुनवाई होगी. प्रशासन ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है. इससे पहले मई में जनसुनवाई आयोजित की गई थी, मगर ग्रामीणों के विरोध के चलते उसे स्थगित करना पड़ा था.

परियोजना के खिलाफ बनी चुटका परमाणु संघर्ष समिति के अध्यक्ष दादूलाल, उपाध्यक्ष दयाल सिंह पुंदे व सचिव नवरतन दुबे का आरोप है कि ग्रामसभा की अनुमति व सहमति के बिना ही संयंत्र की इकाई स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

एक तरफ जहां प्रशासन जनसुनवाई की तैयारी में है, वहीं विस्थापन की आशंका से घिरे परिवार पुरजोर विरोध करने का मन बना चुके हैं.

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