Rss

  • stumble
  • youtube
  • linkedin

 याकूब तो याकूब ही रह गया  #Poem

yakub1
सुप्रीम कौर्ट सारे जहां से ऊपर हो गया 
जो 150 साल के काले इतिहास में नहीं हुआ 
वो रात के एक पहर में हो गया 
बलि के लिए बकरे की जगह इंसान चढ़ गया 
महामहिम बूढ़ा होने के बाद भी खूंखार निकल गया 
आतंकवाद की खातिर याकूब इंसान बन गया 
काले कोट की चाव में सारा दरबार बिक गया 
सत्ता के दलालों के आंगे लोकतंत्र झुक गया 
बमों के धमाकों से जिंदगी रूकती नहीं 
फांसी के फंदों से जम्हूरियत बदलती नहीं 
वक्त जमीं से चाँद पार कर गया  
पर अँधा कानून अँधा का अँधा ही रह गया 
याकूब तो याकूब ही रह गया 
सुप्रीम कौर्ट सारे जहां से ऊपर हो गया 
कुत्तों की पाठशाला में गधा बेरिस्टर बन गया 
पर नंगा लोकतंत्र नंगा का नंगा ही रह गया 
याकूब तो याकूब ही रह गया 
                     सुप्रीम कौर्ट सारे जहां से ऊपर हो गया ………………..
के एम् भाई 

Related posts

Leave a Reply

%d bloggers like this: