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Chhattisgarh Official’s Facebook Post Reveals Horrific Police Torture Of Minor Tribal Girls

Varsha Dongre, who deleted her post later, called for introspection.

02/05/2017 3:

AFP/GETTY IMAGES

A woman official of the government of Chhattisgarh has irked the authorities with a Facebook post raising questions about a model of governance that allows for alleged harassment of tribal people in the state.

“I am a witness to the torture of minor tribal girls … In the police stations, women personnel have stripped and tortured girls as old as 14 and 16 … They were given electric shock on their hands and breasts. I have seen the marks … I was horrified … Why third-degree torture on minors? I have given directions for their treatment”, Varsha Dongre, deputy jailer of Raipur Central Jail, recently wrote in a post in Hindi.

“We need to introspect, because those who are getting killed in either side of this war in Bastar are our own people. The capitalist system is being forced on Bastar, tribals are being pushed out of their lands, their villages are being burnt, women raped — all this to grab land and forests. All this isn’t being done to end Naxalism“, she added.

Coming in the wake of the Maoist attack on CRPF jawans in Sukma district of the state, her comments were shared widely on social media. The jail department has ordered a probe, based on her allegations.

“The tribals can’t leave this place as it is their land but when law-enforcers target women and minor girls and false case are registered, where do the victims go for justice?” she went on. “The CBI report says it, the court says it — this is the reality. When human rights workers or journalists tell the truth, they are sent to jail. If everything is fine in tribal lands, why government is so afraid and why people are not allowed to go there?”

Dongre invoked India’s constitution to say it doesn’t allow anyone the right to harass and torture another citizen. “A particular kind of development can’t be thrust on the adivasis,” she said. “Farmers and jawans are brothers, they shouldn’t kill each other.”

Known to be an upright officer, Dongre had approached the Chhattisgarh High Court in the PSC scam case in 2007. Based on a Right to Information application filed by her, action against top PSC officials, accused of irregularities and corruption.

After her post drew attention and caused a controversy, Dongre has now been taken off. However, talking to media persons later, she said that she had merely exercised her right to freedom of expression.

Meanwhile, a probe has been ordered by the jail authorities. “A top jail official has ordered an inquiry in this regard”, a prison department official said. A DIG-rank officer would conduct the probe, sources said.\

वर्षा डोंगरे ने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा था कि- मुझे लगता है कि एक बार हम सभी को अपना गिरेबान झांकना चाहिए, सच्चाई खुद ब खुद सामने आ जाएगी. घटना में दोनों तरफ मरने वाले अपने देशवासी हैं…भारतीय हैं. इसलिए कोई भी मरे तकलीफ हम सबको होती है. लेकिन पूँजीवादी व्यवस्था को आदिवासी क्षेत्रों में जबरदस्ती लागू करवाना… उनकी जल जंगल जमीन से बेदखल करने के लिए गांव का गांव जलवा देना, आदिवासी महिलाओं के साथ बलात्कार, आदिवासी महिलाएं नक्सली हैं या नहीं, इसका प्रमाण पत्र देने के लिए उनका स्तन निचोड़कर दुध निकालकर देखा जाता है. टाईगर प्रोजेक्ट के नाम पर आदिवासियों को जल जंगल जमीन से बेदखल करने की रणनीति बनती है, जबकि संविधान अनुसार 5 वीं अनुसूची में शामिल होने के कारण सैनिक सरकार को कोई हक नहीं बनता आदिवासियों के जल जंगल और जमीन को हड़पने का….आखिर ये सबकुछ क्यों हो रहा है. नक्सलवाद खत्म करने के लिए… लगता नहीं.

वर्षा के अनुसार- सच तो यह है कि सारे प्राकृतिक खनिज संसाधन इन्हीं जंगलों में हैं, जिसे उद्योगपतियों और पूंजीपतियों को बेचने के लिए खाली करवाना है. आदिवासी जल जंगल जमींन खाली नहीं करेंगे क्योंकि यह उनकी मातृभूमि है. वो नक्सलवाद का अंत तो चाहते हैं लेकिन जिस तरह से देश के रक्षक ही उनकी बहू बेटियों की इज्जत उतार रहे हैं, उनके घर जला रहे हैं, उन्हे फर्जी केशों में चारदीवारी में सड़ने भेजा जा रहा है. तो आखिर वो न्याय प्राप्ति के लिए कहां जायें. ये सब मैं नहीं कह रही सीबीआई रिपोर्ट कहती है, सुप्रीम कोर्ट कहती है, जमीनी हकीकत कहती है. जो भी आदिवासियों की समस्या समाधान का प्रयत्न करने की कोशिश करते हैं, चाहे वह मानव अधिकार कार्यकर्ता हों, चाहे पत्रकार… उन्हें फर्जी नक्सली केसों में जेल में ठूंस दिया जाता है. अगर आदिवासी क्षेत्रों में सबकुछ ठीक हो रहा है तो सरकार इतना डरती क्यों है. ऐसा क्या कारण है कि वहां किसी को भी सच्चाई जानने के लिए जाने नहीं दिया जाता.

मैंने स्वयं बस्तर में 14 से 16 वर्ष की मुड़िया माड़िया आदिवासी बच्चियों को देखा था, जिनको थाने में महिला पुलिस को बाहर कर पूरा नग्न कर प्रताड़ित किया गया था. उनके दोनों हाथों की कलाईयों और स्तनों पर करेंट लगाया गया था, जिसके निशान मैंने स्वयं देखे. मैं भीतर तक सिहर उठी थी कि इन छोटी-छोटी आदिवासी बच्चियों पर थर्ड डिग्री टार्चर किस लिए. मैंने डाक्टर से उचित उपचार व आवश्यक कार्यवाही के लिए कहा.

वर्षा डोंगरे ने सोशल मीडिया में लिखा- हमारे देश का संविधान और कानून यह कतई हक नहीं देता कि किसी के साथ अत्याचार करें. इसलिए सभी को जागना होगा. राज्य में 5 वीं अनुसूची लागू होनी चाहिए. आदिवासियों का विकास आदिवासियों के हिसाब से होना चाहिए. उन पर जबरदस्ती विकास ना थोपा जाये. आदिवासी प्रकृति के संरक्षक हैं. हमें भी प्रकृति का संरक्षक बनना चाहिए ना कि संहारक… पूँजीपतियों के दलालों की दोगली नीति को समझें …किसान जवान सब भाई-भाई हैं. अतः एक दूसरे को मारकर न ही शांति स्थापित होगी और ना ही विकास होगा. संविधान में न्याय सबके लिए है, इसलिए न्याय सबके साथ हो.

अपने अनुभवों को साझा करते हुये वर्षा डोंगरे ने लिखा कि- हम भी इसी सिस्टम के शिकार हुए लेकिन अन्याय के खिलाफ जंग लड़े, षडयंत्र रचकर तोड़ने की कोशिश की गई, प्रलोभन रिश्वत का ऑफर भी दिया गया, वह भी माननीय मुख्य न्यायाधीश बिलासपुर छ.ग. के समक्ष निर्णय दिनांक 26.08.2016 का पैरा 69 स्वयं देख सकते हैं. लेकिन हमने इनके सारे इरादे नाकाम कर दिए और सत्य की विजय हुई… आगे भी होगी.

वर्षा ने लिखा है- अब भी समय है, सच्चाई को समझे नहीं तो शतरंज की मोहरों की भांति इस्तेमाल कर पूंजीपतियों के दलाल इस देश से इन्सानियत ही खत्म कर देंगे. ना हम अन्याय करेंगे और ना सहेंगे. जय संविधान, जय भारत.

http://www.huffingtonpost.in/2017/05/02/chhattisgarh-officials-facebook-post-reveals-horrific-police-to_a_22064696/

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Comments (3)

  1. K SHESHU BABU

    The torture of girls and minors is violation of human rights, particularl child rights. The matter should be investigated and such heinous acts must bebstopped

  2. to stop these barbaric acts by the local police in their police stations would be stopped only either through the Political Power or Armed Power of the People. But sadly, both powerless people have become the target to the police. So is there any other way except these two ways to stop the atrocities on tribal child and women in this Bastar range?

  3. to stop these barbaric acts by the local police in their police stations there are only two ways that are either through the Political Power or through Armed Power of the People. But sadly, both powerless people have become the target to the police. So is there any other way except these two ways to stop the atrocities on tribal child and women in this Bastar range?

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