-Bridge the Gap Bring the Change

देश को आर्थिक अराजकता की तरफ तो नहीं ले जायेगा जीएसटी ?

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 ममता मेघवंशी

 

कल आधी रात को भारत की संसद ने एक जश्न के साथ जीएसटी कानून लागू कर दिया ,इसे एक राष्ट्र –एक टैक्स की अवधारणा के तहत लागू किया गया है . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए गुड एंड सिंपल टैक्स बताया है ,हालाँकि मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे ,तब यूपीए सरकार के जीएसटी लागू करने के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुये इसे विनाशकारी बताते थे ,मगर अब उन्हें वही टैक्स प्रणाली देश को नई ऊँचाई पर ले जाने वाली लगने लगी है .

खैर ,इसके सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों पर जरुर बात की जानी चाहिए ,पीएम ने अपने भाषण में यह नहीं कहा कि यह कर कानून कश्मीर से कन्याकुमारी तक मौजूद भारत में एक साथ लागू हो रहा है ,उन्होंने कहा कि गंगानगर से एटानगर यह लागू होगा ,फिर लेह से लक्षद्वीप भी बोले ,मगर सच तो यही है कि जम्मू कश्मीर में अभी जीएसटी लागू नहीं होगा ,शेष देश इसके अच्छे बुरे परिणामों को भोगेगा .

नेशनल कौंसिल ऑफ़ एम्प्लोयड रिसर्च ने दावा किया है कि जीएसटी लागू होने के बाद जीडीपी में 1 से पौने दो फीसदी की बढ़ोत्तरी हो सकती है ,यह भी सही है कि इससे अलग अलग कई प्रकार के टैक्स कम हो जायेंगे ,हर राज्य में टैक्स देने की बाध्यता कम हो जाएगी .अगर यह वाकई जैसा प्रधानमन्त्री ने कहा है ,वैसा सरल और अच्छा कर कानून है तो फिर इसका विरोध क्यों हो रहा है ?

क्या इससे राज्यों की स्वायत्तता को नुकसान होगा ,केंद्र पर संसाधनों के लिए निर्भरता नहीं बढ़ जाएगी ? केंद्र ने अगर फंड अलोकेशन में भेदभाव बरता तब राज्य क्या करेंगे ? क्या जीएसटी हमारे देश के फेडरल स्ट्रक्चर को क्षति पंहुचने वाला होगा ,ऐसे कई प्रश्न जरुर है ,जिन पर अभी बात होना बाकी है .

व्यापारी ,छोटे उद्यमी भी इस कानून से काफी आतंकित नजर आ रहे है .कहा जा रहा है कि अगर जीएसटी के भुगतान को लेकर कोई गलती हुई तो व्यापारी को जेल भेजा जा सकेगा ,इस तरह व्यापर जगत के लोग महसूस कर रहे है कि इस सरकार ने उन्हें चोर का दर्जा दे दिया है .व्यापारी ,छोटे दुकानदार क्या सिर्फ कमा कमा कर चार्टेड अकाउंटेंट को ही देते रहेंगे ?वो दुकान चलाएंगे या साल भर 24 बार कर भुगतान के फार्म भरते नजर आयेंगे ?

कुछ वस्तुएं सस्ती और काफी सारी चीज़ें महंगी की गई है ,इससे मंहगाई बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है ,जिसका खामियाजा अंततः आम गरीब इंसानों को ही चुकाना होगा ,नोटबंदी के सदमे से भी अभी देश उबर नहीं पाया है कि केंद्र सरकार ने बिना किसी बड़ी तैयारी और कर संग्रहण ढांचे को निर्मित किये बगैर ही देश पर जीएसटी लाद दिया है .

किसान तो पहले से ही आन्दोलन की राह पर है ,अब व्यापारी भी सड़क पर उतरनेवाले है ,इस आपाधापी के चलते देश कहीं आर्थिक अराजकता की दिशा में नहीं चला जाये ,यह बड़ी चिंता का विषय है .

रात को जीएसटी लागू हुआ है और सुबह होते होते मंडी में टमाटर 100 रूपये किलो हो चुके है ,मिर्च,भिन्डी ,बैंगन  60 के है ,प्याज के दाम बढ़ रहे है ,अभी तो यह शुरुआत मात्र है ,कहा गया था कि खाने पीने की वस्तुओं के दाम सस्ते होंगे ,लेकिन एकदम से इतने सस्ते (?) हो जायेंगे ,यह तो सोचा भी नहीं था .आर्थिक उदारीकरण और खुले बाजार की वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में मोदी जी की यह नए नए प्रयोग देश पर लादने की सनक भारतीय अर्थव्यवस्था को दिवालिया ना कर दे ,ऐसी बातें लोग अब सार्वजनिक रूप से बोलने लगे है .सोशल मीडिया के ज़रिये जिस तरह जीएसटी को लागू करने ,उसके प्रावधानों का मजाक उड़ा है ,वह मोदी की निरंतर कम हो रही लोकप्रियता का संकेत है .

( टिप्पणीकार एमडीएस युनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही है )

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2 Comments

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  1. The implementation of GST amidst speculations had mixed response. It’s success can ne known only in future

  2. The success of GST can be deermined only in future after its total implementation n all states

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