How can govt make sure your data is safe?

India Today investigation reveals how the staff at UIDAI enrolment centres are willing to sell information for petty cash.

Agents at several enrolment agencies are willing to part with demographic records collected from Aadhaar applicants for Rs 2-5.Agents at several enrolment agencies are willing to part with demographic records collected from Aadhaar applicants for Rs 2-5.

Nandan Nilekani‘s trailblazing biometric ID system, apparently modelled on first FBI director J Edgar Hoover‘s massive central database of fingerprints, is in spotlight after reports of a cyber attack which leaked Aadhaar data. A report by The Tribune had claimed that one of its reporters paid just Rs 500 to an ‘online agent’ to access names, addresses, PINs, photos, phone numbers and emails of more than 1 million numbers.

However, an India Today investigation has revealed that the Aadhaar data breach racket is not merely online, but could be widespread with agents at several enrolment agencies willing to part with demographic records collected from Aadhaar applicants for Rs 2-5.

Enrolment agencies are entities hired by the Registrars for enrolment of residents during which demographic and biometric data are collected as per UIDAI enrolment process, according to uidai.gov.in.

One such enrolment agency is Alankit Assignments Limited, located in Faridabad. “You can see for yourself,” said Alankit’s branch head Ishpal Singh when asked is this Aadhar data as he planked an entire file of 250 applicants on his desk.

YOUR CHOICE- SCAN THROUGH OR COPY DATA

“I can give you data of 15,000 applicants for Rs 30,000,” a brazen Singh, who is the branch head of Alankit, told India Today reporters, who posed as businessmen seeking to expand their database of potential customers. He was ready to provide an applicant’s name, address, birth date, mobile numbers and email for merely Rs 2.

Subsequently, Singh advised the India Today reporters to copy down every bit of information from his dossiers right there. “I will give you a bundle of 250 forms (application acknowledgements). I have records of 50,000 applicants. You can note down all the data.”

The probe shows how Section 28 of the Aadhaar Act, which states that the UIDAI must ensure the security and confidentiality of identity information and authentication records, is brazenly flouted. “The Authority shall adopt and implement appropriate technical and organisational security measures, and ensure the same are imposed through agreements/arrangements with its agents, consultants, advisors or other persons,” Section 28 further states.

PRIVACY GONE FOR A TOSS

Nilekani, the architect of Aadhaar, had vouched for its security last April. “It’s a very, very secure system. The level of encryption that Aadhaar has is way above any other system today, including in the private sector. Plus, security keeps getting enhanced,” he had said.

Another enrolment centre at Indirapuram, Ghaziabad, was willing to sell data of 4-5 lakh applicants. Senior official Ashish Gupta offered the database not only from this facility, but also from three others under his command in Delhi.

“I’ll get the data on an Excel sheet,” Gupta replied when asked if he could offer information about all the applicants in Indirapuram. He is ready to provide all this data for Rs3-5 per applicant.

An Aadhaar enrolment centre at Sector 10, Noida, was no different with the main agent, Sonu, demanding Rs 4-5 per applicant. “I have made 40,000 Aadhaar cards so far.” He offered PDF copies of acknowledgements of applicant’s information.

These agents are operating with blatant disregard for the Aadhaar Act. Section 37 of the Act says “intentional disclosure or dissemination of identity information, to any person not authorised under the Aadhaar Act, or in violation of any agreement entered into under the Act, will be punishable with imprisonment up to three years or a fine up to ten thousand rupees (in case of an individual), and fine up to one lakh rupees (in case of a company)”

2 से 5 रुपए में मिल रहीं आधार की डिटेल, एनरोलमेंट एजेंसियों के एजेंट बेच रहे डाटा

आधार कार्ड आधार कार्ड
मो.हिज्बुल्लाह/मसरूर हसन [Edited by: खुशदीप सहगल]

मो.हिज्बुल्लाह/मसरूर हसन [Edited by: खुशदीप सहगल]

नई दिल्ली , 05 जनवरी 2018, अपडेटेड 21:09 IST

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आधार डेटा लीक होने संबंधी एक साइबर हमले की रिपोर्टों के बाद नंदन नीलेकणि का विकसित किया बॉयोमीट्रिक आईडी सिस्टम सुर्खियों में है. आधार का मॉडल मोटे तौर पर पहले एफबीआई डायरेक्टर जे एडगर हूवर के बनाए फिंगरप्रिंट्स के विशाल डेटाबेस की तर्ज पर बना है. ‘द ट्रिब्यून’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि एक ‘ऑनलाइन एजेंट’ ने उसके रिपोर्टर को महज 500 रुपए के बदले लॉग इन आईडी और पासवर्ड देकर देकर दस लाख नंबरों की प्राइवेट जानकारी देखने की सुविधा दे दी. दावे के मुताबिक इस जानकारी में नाम, पता, पोस्टल कोड, फोटो, फोन नंबर, ई-मेल आदि देखा जा सकता था.

हालांकि इंडिया टुडे की विशेष जांच टीम की तहकीकात में खुलासा हुआ कि आधार डेटा में सेंध लगाने से जुड़ा रैकेट सिर्फ ऑनलाइन तक ही सीमित नहीं है और इसके तार व्यापक पैमाने पर फैले हो सकते हैं. जांच से सामने आया कि कई एनरोलमेंट एजेंसियों के एजेंट आधार आवेदकों से हासिल की जानकारी के रिकॉर्ड महज 2 से 5 रुपए में बेचने को तैयार दिखे.

Uidai.gov.in  के मुताबिक रजिस्ट्रार्स की ओर से एनरोलमेंट एजेंसियों की सेवाएं भाड़े पर ली गई थीं. इन एजेंसियों की UIDAI  प्रक्रिया के तहत नागरिकों को एनरोल कर उनके डेमोग्राफिक और बॉयोमीट्रिक आंकड़े जुटाए जाने थे.

ऐसी ही एक एजेंसी ‘अलंकित असाइनमेंट्स’ फरीदाबाद में स्थित है. यहां के ब्रांच प्रमुख इशपाल सिंह से अंडर कवर रिपोर्टर कारोबारी बनकर मिले और अपने संभावित ग्राहक तलाशने के लिए आधार डेटा खरीदने की बात की. इस पर इशपाल ने 250 आधार आवेदकों की फाइल मेज पर रखते हुए कहा कि ये आधार डेटा है और ऐसा ही 15000 डेटा आपको दूंगा. इस काम के लिए इशपाल ने 30,000 रुपए की मांग की. हैरानी की बात है कि इशपाल एक आधार आवेदक के नाम, पते, जन्मदिन, मोबाइल नंबर और ई मेल की जानकारी महज 2 रुपए में देने को तैयार दिखा.

इसके बाद इशपाल ने इंडिया टुडे के अंडर कवर रिपोर्टर्स को अपने डोजियर्स से हर जानकारी कॉपी डाउन करने की सलाह दी. इशपाल ने कहा, ‘मैं आपको 250 फार्म्स का बंडल दूंगा. मेरे पास 50,000 आवेदकों का रिकॉर्ड है. आप सारा डेटा हासिल कर सकते हैं.’

जांच से सामने आया कि किस तरह आधार एक्ट के सेक्शन 28 की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. सेक्शन 28 के मुताबिक आवेदकों की पहचान से जुड़ी जानकारी और उसके प्रमाणन रिकॉर्ड की सुरक्षा और गोपनीयता को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी UIDAI की है. सेक्शन 28 में आगे कहा गया है कि अथॉरिटी जरूरी तकनीकी और सांगठनिक सुरक्षा उपायों को अपनाए और अमल में लाए. साथ ही एजेंटों, सलाहकारों और अन्य व्यक्तियों से समझौते या अनुबंध करते वक्त भी इन सुरक्षा उपायों का पालन सुनिश्चित करे.

आधार के सूत्रधार नंदन नीलेकणि ने बीते साल अप्रैल में आधार की सुरक्षा पुख्ता होने का दावा किया था. उन्होंने कहा था कि ये बहुत बहुत सुरक्षित सिस्टम है. इंडिया टुडे के अंडर कवर रिपोर्टर्स ने गाजियाबाद के इंदिरापुरम में स्थित एक और एनरोलमेंट सेंटर का रुख किया. ये सेंटर 4-5 लाख आवेदकों का डेटा बेचने को तैयार दिखा. यहां के वरिष्ठ अधिकारी आशीष गुप्ता ने ना सिर्फ इस सेंटर से बल्कि दिल्ली में अपने तहत आने वाले तीन और सेंटरों से भी डेटाबेस उपलब्ध कराने की बात कही.

आशीष गुप्ता से जब पूछा गया कि क्या वो इंदिरापुरम के सभी आवेदकों की जानकारी उपलब्ध करा सकता है तो उसने कहा, ‘मैं एक्सल शीट पर डेटा उपलब्ध करा दूंगा.’ आशीष गुप्ता ने 3-4 रुपए प्रति आवेदक के हिसाब से जानकारी हासिल कराने की पेशकश की.

नोएडा के सेक्टर 10 में स्थित एक एनरोलमेंट सेंटर भी इस मामले में अलग नहीं दिखा. यहां के प्रमुख एजेंट सोनू ने जानकारी देने के लिए प्रति आवेदक 4-5 रुपए के हिसाब से मांग की. सोनू ने दावा किया कि उसने अभी तक 40,000 आधार कार्ड बनाए हैं. सोनू ने आवेदकों की जानकारी की पावती की पीडीएफ कॉपी देने की पेशकश की.

ये एजेंट और अधिकारी आधार एक्ट के प्रावधानों को खुलेआम ठेंगा दिखाते हुए इस गोरखधंधे में लगे हैं. आधार एक्ट का सेक्शन 37 कहता है, “किसी भी व्यक्ति की पहचान से जुड़ी सूचना का प्रसार या इरादतन खुलासा आधार एक्ट के तहत अधिकृत नहीं है. एक्ट के तहत किसी भी समझौते के उल्लंघन पर तीन साल तक कारावास की सजा या दस हजार रुपए तक जुर्माना (व्यक्ति की स्थिति में) हो सकता है. कंपनी की स्थिति में जुर्माना एक लाख रुपए तक हो सकता है.”

http://indiatoday.intoday.in/story/aadhaar-details-on-sale-for-rs-2-5-uidai-securing-data/1/1124473.html

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