Factory Workers form factory committees for ensuring the implementation of the agreement
Delhi, 7 July. The struggle of the hot rolling steel workers completed one month today and it was also the third day of their relay hunger strike. It was today itself that the workers secured their third victory. As you know, after 22-day long strike of the hot rolling steel workers, the owners were forced to compromise on June 27 and June 28 when they gave in writing to abide by all the labour laws. But they backtracked from the agreement the next day. Consequently the workers’ movement continued. The workers used to go to the factory gates daily till 4 July. When the owners did not open the factories for implementing the agreement, the workers even went on to occupy the factory gates. Meanwhile the police arrested the members of ‘Garam Rolla Mazdoor Ekta Samiti’ and ‘Bigul Mazdoor Dasta’ twice and the owners even launched an attack through the hired goons, but despite all this the workers got their comrades released and gave fitting reply to the goons as well. The workers commenced their relay hunger strike from 5 July at Raja Park in Wazirpur. The mobilisation of workers was swelling with each passing day and the owners were incapable to run the factories. Today the owners had to respond to the ‘show cause notice’ issued by the labour department. A delegation of ‘Garam Rolla Mazdoor Ekta Samiti’ led by Shivani, Sunny and Raghuraj had also reached the labour department. During the talks, the advocates from the owners side gave in writing that from now on the workers will not be forced to work for 12 hours a day and all the owners will respect the agreement. After this the delegation of the ‘Garam Rolla Mazdoor Ekta Samiti’ returned and broke the hunger strike of the comrades sitting on hunger strike and announced the victory.
Shivani, the legal consultant of the ‘Garam Rolla Mazdoor Ekta Samiti’ and a member of ‘Bigul Mazdoor Dasta’ told that factory committees of workers have been formed in all the factories and their heads are appointed today for ensuring the implementation of the agreement. These factory committees in the leadership of their head will decide that the workers will go to work at 9 am and return at 6 pm. These 9 hours include 30 minutes lunch break and two tea break of 15 minutes each and the workers will get 30 minute relief after every 30 minute. Shivani told that the workers do not have faith on the owners’ written assurance and hence tomorrow (8 July) the labour inspector and factory inspector will be present in the Wazirpur industrial area in the morning. These inspector will also be present in the evening at 6 pm. In case the workers are forced to stay in the factory beyond the working hours, the factory committees of workers will immediately make a call to police at phone no 100 and also to labour inspector, factory inspector, and Shivani, Sunny or Raghuraj, the members of the leading committee. The workers have been given the phone numbers of Deputy Labour Commissioner and Joint Labour Commissioner. If any of the factory owners refuses to implement the agreement, immediate action will be taken against him.
Sunny, a member of the Committee told that the agreement will be fully implemented in the coming days. The workers are not prepared to step back in any circumstance. The workers of the cold rolling steel plants also participated in this fight with full enthusiasm along with their brethren of hot rolling steel plants. It is during this strike itself that the workers of cold rolling plants also decided to form their committee and the members of the ‘Garam Rolla Mazdoor Ekta Samiti’ are helping them in this regard. The workers of the cold rolling steel plant who visited today’s meeting decided that they will ensure that the agreement of the hot rolling steel plants gets implemented in their factories as well.
The Wazirpur workers’ movement secured several achievements in this one month. Firstly this movement threw away the renegades and agents of ‘Inqlabi Mazdoor Kendra’ from the movement. The workers threw these renegades away from Wazirpur first on 20 June and then on 29 June. Despite this these renegades continued to spread misinformation about this movement in such a silly manner that one can only laugh at them. These renegades first claimed that the workers are exhausted and and are waiting for a shameful agreement; then they termed the 27 June and 28 June agreement as “shameful agreement”; when a copy of this agreement was posted on the blog of Garam Rolla Mazdoor Ekta Samiti, they changed their tone and started calling this agreement as “illusory”. Despite all this, the workers continued their struggle and by gaining one victory after another they have given a tight slap to these renegades.
The starting of the community kitchen was the second biggest achievement for this movement. Besides the workers also performed a brilliant experiment of occupying the factory gates. The movement valiantly countered the police repression and attack by goons and in one such incident hundreds of worker lied down in front of the police van to stop it from going ahead to arrest the leaders. We will provide a detailed evaluation of this movement further on this blog.
Today’s victory is not the end of this movement. Firstly it will be ensured that today’s agreement gets implemented in toto and subsequently fight for implementing other labour laws such as safety provisions etc. will be carried on. Also, a union of hot rolling and cold rolling steel workers will be formed whose proposed name is ‘Wazirpur Karkhana Mazdoor Union’. The process of registration of this union will be initiated in the month of July itself.
Long live struggle!
Long live workers’ unity!
Long live revolution!
भूख हड़ताल के तीसरे दिन गरम रोला मज़दूरों की शानदार जीतः मालिकों ने समझौते पर शब्दशः अमल का लिखित वायदा किया
समझौते पर अमल के लिए कारखाने के मज़दूरों ने कारखाना समितियों का गठन किया
गरम रोला मज़दूरों के संघर्ष को आज ठीक एक माह पूरे हुए और साथ ही उनकी क्रमिक भूख हड़ताल का तीसरा दिन भी था। आज ही ‘गरम रोला मज़दूर एकता समिति’ के नेतृत्व में गरम रोला मज़दूरों ने अपनी तीसरी जीत दर्ज़ की। जैसा कि आपको पता है कि 27 और 28 जून को मज़दूरों के 22 दिनों की हड़ताल के बाद मालिकों को उप श्रमायुक्त के समक्ष मज़दूरों को सभी श्रम अधिकार देने का लिखित समझौता करना पड़ा था। लेकिन अगले दिन ही वे इस समझौते को लागू करने में आना-कानी करने लगे थे। नतीजतन, मज़दूरों का आन्दोलन जारी रहा। मज़दूर 4 जुलाई तक रोज़ कारखाने के गेट पर जाते थे। जब मालिकों ने कारखाने समझौते को लागू करने के लिए नहीं खोले तो फिर मज़दूरों ने गेटों पर कब्ज़ा भी किया। इसी बीच पुलिस ने दो बार ‘गरम रोला मज़दूर एकता समिति’ और‘बिगुल मज़दूर दस्ता’ के साथियों को गिरफ्तार भी किया और मालिकों ने गुण्डों से हमला भी करवाया लेकिन इसके बावजूद मज़दूरों ने अपने साथियों को पुलिस की हिरासत से भी छुड़ा लिया और साथ ही गुण्डों का भी मुँहतोड़ जवाब दिया। 5 जुलाई से मज़दूरों ने वज़ीरपुर के राजा पार्क में क्रमिक भूख हड़ताल की शुरुआत की। हर दिन के साथ मज़दूरों की गोलबन्दी बढ़ रही थी और तमाम मालिकान अपने कारखानों को चलाने में असफल सिद्ध हो रहे थे। आज श्रम विभाग में मालिकों को श्रम विभाग द्वारा जारी किये गये ‘कारण बताओ नोटिस’ का जवाब देना था।‘गरम रोला मज़दूर एकता समिति’ का प्रतिनिधि मण्डल भी श्रम विभाग पहुँचा था, जिसकी अगुवाई शिवानी, सनी और रघुराज कर रहे थे। वार्ता में मालिकों ओर से आए वकीलों ने लिखित तौर पर वायदा किया कि अब से मज़दूरों को कारखानों में 12 घण्टे काम करने के लिए बाध्य नहीं किया जायेगा और सभी मालिक समझौते का सम्मान करेंगे। इसके बाद ‘गरम रोला मज़दूर एकता समिति’ का प्रतिनिधि मण्डल वापस लौटा और उन्होंने आज भूख हड़ताल पर बैठे साथियों की भूख हड़ताल तोड़ी और विजय का एलान किया।
‘गरम रोला मज़दूर एकता समिति’ की कानूनी सलाहकार और ‘बिगुल मज़दूर दस्ता’ की शिवानी ने बताया कि इस समझौते को लागू करवाने के लिए आज सभी कारखानों के मज़दूरों की कारखाना समितियाँ बनायीं गयीं हैं और उनके प्रधान नियुक्त किये गये हैं। ये कारखाना समितियाँ अपने प्रधानों की अगुवाई में यह सुनिश्चित करेंगी कि मज़दूर सुबह 9 बजे काम पर जायेंगे और फिर6 बजे काम से लौट आयेंगे। इन 9 घण्टों में 30 मिनट का खाने का ब्रेक, दो 15 मिनट के टी ब्रेक मिलेंगे और हर 30 मिनट के काम के बाद 30 मिनट का रिलीफ मिलेगा। शिवानी ने कहा कि इस समझौते को लागू करने के मालिकों के लिखित आश्वासन पर मज़दूर यक़ीन नहीं करते और इसीलिए कल यानी कि 8 जुलाई को कारखानों के खुलने के समय पर लेबर इंस्पेक्टर और फैक्टरी इंस्पेक्टर वज़ीरपुर इण्डस्ट्रियल एरिया में मौजूद रहेंगे; ये इंस्पेक्टर शाम को 6 बजे भी मौजूद रहेंगे जिस समय मज़दूर कारखानों से बाहर निकलेंगे। अगर किसी कारखाने में मज़दूरों को रोकने की कोशिश की गयी तो मज़दूरों की कारखाना समिति के प्रधान तत्काल पुलिस को 100 नम्बर पर और साथ ही लेबर इंस्पेक्टर, फैक्टरी इंस्पेक्टर और यूनियन के नेतृत्वकारी समिति के सदस्य शिवानी, सनी या रघुराज को फोन करेंगे। मज़दूरों को उप श्रमायुक्त और संयुक्त श्रम आयुक्त के फोन नम्बर पर दे दिये गये हैं। कल अगर कोई भी मालिक समझौते को लागू करने में आनाकानी करता है तो उस पर तुरन्त ही कार्रवाई की जायेगी।
समिति के सदस्य सनी ने बताया कि आने वाले कुछ दिनों में समझौते को पूरी तरह लागू कर दिया जायेगा। मज़दूर किसी भी किस्म से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इस लड़ाई में ठण्डा रोला के मज़दूरों ने अपने गरम रोला के साथियों के साथ पूरे जोश के साथ भाग लिया। इस हड़ताल के दौरान ही ठण्डा रोला के मज़दूरों ने भी अपनी समिति बनाने का निर्णय लिया है और ‘गरम रोला मज़दूर एकता समिति’ के नेतृत्वकारी समिति इसमें उनकी मदद कर रहे हैं। आज की सभा में आये ठण्डा रोला के मज़दूरों ने निर्णय किया कि गरम रोला मज़दूरों द्वारा लागू करवाये गये समझौते को ही वे ठण्डा रोला कारखानों में भी लागू करवाएँगे।
वज़ीरपुर मज़दूर आन्दोलन को इस एक माह में कई उपलब्धियाँ हासिल हुई हैं। सबसे पहले इस आन्दोलन ने ‘इंक़लाबी मज़दूर केन्द्र’ के दलालों और ग़द्दारों को आन्दोलन में से खदेड़कर बाहर किया। पहले 20 जून और फिर 29 जून को इन दलालों को मज़दूरों ने वज़ीरपुर से बाहर कर दिया। इसके बावजूद इन दलालों ने आन्दोलन के बारे में ऐसे प्रचार जारी रखे जिन पर सिर्फ हँसा जा सकता है। इन दलालों ने दावा किया कि मज़दूर थक गये हैं और शर्मनाक समझौते का इन्तज़ार कर रहे हैं; फिर इन्होंने27 और 28 जून के समझौते को “शर्मनाक समझौता” कहा; जब इस समझौते की कॉपी को गरम रोला ब्लॉग पर डाल दिया गया तो फिर उन्हें अपनी बात बदल ली और इस समझौते को “भ्रामक” बताने लगे। इसके बाद भी मज़दूरों ने अपने संघर्ष को जारी रखकर और एक के बाद एक जीतें हासिल करके इन दलालों के मुँह पर तमाचे ही लगाये हैं।
इस आन्दोलन की दूसरी बड़ी उपलब्धि थी हड़ताली मज़दूरों की सहायता के लिए सामुदायिक रसोई की शुरुआत। साथ ही, मज़दूरों ने कारखाना गेटों पर कब्ज़ा करने का भी शानदार प्रयोग किया। आन्दोलन ने पुलिस दमन और गुण्डों के हमलों का ज़बर्दस्त मुकाबला किया और एक घटना में अपने नेताओं की गिरफ्तारी को रोकने के लिए सैंकड़ों मज़दूर पुलिस वैन के सामने लेट गये। इस आन्दोलन का एक विस्तृत मूल्यांकन आगे हम ब्लॉग पर देंगे।
आज की जीत आन्दोलन की समाप्ति नहीं है। पहले तो आज के समझौते को कारखाना समितियों द्वारा शब्दशः लागू करवाया जायेगा और बाद में अन्य श्रम कानूनों जैसे कि सुरक्षा प्रावधानों को लागू करने की लड़ाई को भी लड़ा जायेगा। साथ ही, ठण्डा रोला और गरम रोला मज़दूरों की एक यूनियन बनायी जायेगी जिसका प्रस्तावित नाम ‘वज़ीरपुर कारखाना मज़दूर यूनियन’ है। इस यूनियन के पंजीकरण की प्रक्रिया जुलाई में ही शुरू कर दी जायेगी।
संघर्ष ज़िन्दाबाद!
मज़दूर एकता ज़िन्दाबाद!
इंक़लाब ज़िन्दाबाद!
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