By- Soni Sori in Hospital

I want to say that when I fell ill and my condition was not getting better. I was not getting proper attention of any kind in the hospital but as soon as Lingaram Kodopi wrote about it on whatsapp, all the people who read about it on whatsapp and facebook called up the doctors, and supported me through all measures possible. It is because of this support that the entire team of doctors, from small to big doctors, ran hither-tither every moment to ensure that I am given proper treatment, they kept asking of me and I was given treatment immediately. On account of such treatment, I started to feel better soon and I did get better as well.

Even today, because of my condition the doctor has advised me to stay in the hospital for some more days and rest. They have told me that I need rest and that I am yet to heal, for I have become extremely weak on account of anaemia. But once I was hospitalised they were not giving me my phone. I asked for my phone telling them that I get emergency phone calls which I must attend to. They gave me the phone.

When I was in the hospital bed, I got a phone call from Burkapal and the villagers of Burkapal asked me where I am. I told them that I have been admitted to the hospital. But I could not tell them that I am serious and I asked them what the matter was. They told me that people are being picked up from their village, that four people were picked up and taken via a helicopter, a cloth was tied to the mouth of villagers and they were beaten up so brutally, and some friends were tied by their feet and hung upside down and beaten up badly. What do we do? You always tell us, ever since you have joined us in our struggle, ever since we have resolved to struggle, ever since 40 of our friends were picked up and put in jail, since then we have been continuously fighting.

Whenever we say that we will leave our village and move to Andhra, you tell us that we must stay and fight for our water forest and land. We must fight on. You constantly tell us that we must stay put and fight. Even now they are committing so many atrocities on us, tell us till when do we suffer. What do we do? Should we leave our village and go or should we stay? They said these things to me.

While lying in the hospital bed all I said to them was that do not leave your village. I will do something. But what do I do? What can I do? This is my question.



The second news that I got was about the girls in relation to the incident in Palnar that had happened on 31st July. The family of the girl called me and asked me that, Didi, where are you? I told him that I am admitted in the hospital. He told me that in this matter you all took the matter this forward but do you even know what is happening to my sister.

The Hostel warden has been threatening my sister a lot by saying that she has dishonoured our village and the hostel she and has been constantly harassing all the girls. What are you all doing? When will you find a solution to this? A girl named Sunita was going to the bathroom to commit suicide. We somehow managed to save her. If anything were to happen to my sister then we will only blame you because you have shown us the way of struggle and you are doing nothing. This news also came to me.

After I got this news I did a lot of thinking and forcefully got myself discharged from the hospital. After coming back I thought that in the way in which all friends from the entire country, all well-wishers who always help and support, I wish they can all come forward on the issue of villages such as Palnar and Burkapal and take on these issues, fight for them and go to Burkapal. Burkapal is mired in extreme conflict, terror reigns there, and the people are living a life of constant fear, day and night.

To save Burkapal and its villager, if people go there then that will be the best treatment for me. I so wish this. And as far as the situation in Palnar is, the girls were molested and sexually harassed, and the everyday harassment ongoing there, has been terrorising these children. They also want to be free. They also want some respite.

Friends from the country should come forward for them as well. If they come out then it will be the most effective treatment for my illness. For this reason, after coming home, I want to send out this message to the entire country, and to my countrypersons, it is my appeal to you, my request that please come forward on these issues. Then I will feel that I have been given great respite. Then I will be able to comfortably stay at my house for some days. Then I will be able to take rest in my home. If this is not done, if friends from all over the country do not come and take these issues forward then I will probably have to go to Burkapal, even if going there would cost me my life.

And in the Palnar issue, if the need arises, I will go on hunger strike as a sign of protest. But I will not have to sit on a hunger strike in the circumstances when friends from all over the country come forward on this issue. This is what I have to say.

जब बीमार पड़ने के बाद में मेरी हालत में कोई सुधार नहीं आ रहा था, किसी भी प्रकार में मुझे ध्यान अस्पताल में नहीं दिया जा रहा था, जैसे Lingaram Kodopi ने जिस तरह व्हाट्स अप्प में लिखा, उस व्हाट्स अप्प या फेसबुक में सारे लोगों ने पढ़ कर पुरे मिलकर डॉक्टरों को फ़ोन किया, जैसे भी किया, बहुत ही सपोर्ट मुझे दिया. उस सपोर्ट की वजह से डॉक्टरों की टीम, छोटे से बड़े डॉक्टर हर पल-पल में मेरे इलाज के लिए दौड़ते रहे और मुझे पूछते रहे और तत्कालीन रफ़्तार से मेरा इलाज हुआ जिससे में बहुत ही जल्दी राहत भी महसूस करी और हुआ भी. और मुझे डॉक्टर आज की स्थिति में भी मुझे बोला कि और कुछ दिन तुमको अस्पताल में रहना पड़ेगा, तुम रेस्ट करो, तुमको बहुत ज़रुरत है आराम की क्योंकि तुम्हारी तबियत अभी भी ठीक नहीं है. खून की कमी कि वजह से और और भी तुम्हारी कमज़ोरी हो गए थे. लेकिन मेरे पास लगातार, मैं बेड में रहने के बावजूद मेरेको फ़ोन नहीं दे रहे थे. मैं मांगी फ़ोन, मैं कही की नहीं मेरे पास इमरजेंसी फ़ोन आता है, मेरेको फ़ोन दो. तो मेरेको फ़ोन दिए. तो उस फ़ोन में जब फ़ोन आया, मैं फ़ोन उठाती हूँ, तो मुझे बुर्कापाल से फ़ोन आता है कि बुर्कापाल के लोग ये मुझसे कह रहे हैं कि आप कहाँ हो. तो मैं बताती हूँ कि मैं अस्पताल में एडमिट हूँ. मैं यह नहीं बता पा रही हूँ कि मैं सीरियस हूँ. फिर भी मैंने उनसे पुछा कि आप बताओ क्या बात है. तो यह बताया कि नहीं यहाँ पर लोगों को उठा कर ले गए है. चार व्यक्ति को उठा कर हेलीकाप्टर में लेकर चले गए है और कपडे मूह में बांधकर इतना पिटाई किये है, और कुछ साथियों को पूरा उल्टा पैर लटकाकर मार पीट कर रहे है. हम क्या करे? आप हमेशा बोले हो, जबसे हमारे लड़ाई में जुड़े हो, हम भी जबसे इस लड़ाई में जुड़े है, जबसे हमारे 40 व्यक्ति जेल गए है, तबसे लेकर आज तक हम लड़ रहे है, और हम जब भी बोलते है की हम आंध्रा चले जायेंगे गाँव छोड़कर तब आप बोलते है कि हमको अपने जल जंगल ज़मीन छोड़कर नहीं जाना है, हमको लड़ना है. बार बार आप बोलते हो और हम डटे रहे है. अभी भी हमारे साथ इतना कुछ कर रहे है, कब तक बर्दाश्त करे बताओ, क्या करे हम? हम गाँव छोड़कर जाए की नहीं जाए? यह बात वह बोले. मैं बिस्तर में लेटे लेटे एक ही बात बोली कि गाँव मत छोड़ कर जाना, मैं कुछ करती हूँ. लेकिन मैं क्या करू? मैं क्या कर सकती हूँ? क्या करू यह मेरा सवाल है.


दूसरा यह खबर आया कि पालनार का जो घटना है, जो हुआ है 31 जुलाई को, तो वहाँ की बच्ची का खबर, उसका परिवार मुझे फ़ोन करके बोलता है कि दीदी आप कहाँ हो? मैं बोली मैं अस्पताल में एडमिट हूँ. वह बोले कि उस मामले में आप लोगों ने इतना आगे तो बढ़ाया लेकिन पता है मेरी बहन के साथ क्या हो रहा है. वहाँ की हॉस्टल अधीक्षिका मेरी बहन को बहुत धमका रही है, यह कह कर कि हमारा गाँव को बहुत बदनाम की, आश्रम को बदनाम कर दिया है और सारे बच्चों को बहुत प्रताड़ित किया जा रहा है. और आप लोग क्या कर रहे हो? कब इसके लिए कुछ हल निकालोगे? और इसमें सुनीता नाम की लड़की आत्महत्या करने के लिए बाथरूम की ओर बढ़ रही थी, ले दे कर बची है. अगर मेरी बहन को कुछ हो जाएगा न दीदी तो हम आपको ही बोलेंगे क्योंकि इस लड़ने का रास्ता आपने दिखाया और आप कुछ नहीं कर रहे हो. ये बात भी आई.
तो इस तरह की खबर आने से मैं बहुत सोची और मैं जबरदस्ती डिस्चार्ज करके मैं आई. आने के बाद मैंने सोचा कि जिस तरह मेरे लिए सारा देश के साथी लोग, सारे जो भी शुभचिंतक हमारे लिए हमेशा मदत करते है तो मैं चाहती हूँ कि बुर्कापाल और पालनार जैसे गाँव के लिए ये सारे लोग उसके लिए आगे आये और उस मुद्दे पर आकर लड़ें और बुर्कापाल में लोग जाये. और बुर्कापाल में जैसी अशांति फैली है, और वहाँ पर ऐसी दहशत है, वहाँ के लोग हर रात डर डर कर, हर दिन को भय से जी रहे है, उस को बचाने के लिए लोग वहाँ जायेंगे तो वह मेरा सबसे बड़ा इलाज होगा. मैं यह चाहती हूँ. और पालनार में जो स्थिति है, बच्चों के साथ छेड़-छाड़ हुआ, जो आये दिन प्रताड़ना दिया जा रहा है, वो बच्चे भी भयबीत से जी रहे है. उनको भी एक आजादी चाहिए, उनकी भी एक राहत चाहिए. उसके लिए भी पूरे देश से साथी लोग आगे आये, जिस तरह मेरे इलाज के लिए आये. तो इनके लिए आये और यह मेरी बीमारी का, मेरे इलाज का सबसे बड़ा इलाज होगा. इस लिए मैं घर में आकर पूरे देश को सन्देश देना चाहती हूँ, पूरे देशवासियों से कहना चाहती हूँ, मेरी आपसे अपील है, आज आप सब से निवेदन है की आज इन मुद्दों के लिए आगे आये और मैं तब समझूँगी अपने आपको की मुझे बहुत बड़ा राहत मिला. तो शायद मैं हफ्ता भर आराम से रह सकती हूँ अपने घर में, और मैं रेस्ट कर सकती हूँ. अगर यह नहीं हुआ, पुरे देश के साथी बहार नहीं आये और इन मुद्दों के लिए आगे नहीं बढ़े तो शायद मुझे बुर्कापाल जाना ही होगा, चाहे जाने में मेरी जान क्यूँ ना चली जाए. और इस पालनार मुद्दे के लिए लड़ने के लिए क्यूँ ना जरूरत पड़ेगा तो मैं फिर से इसमें एक आन्दोलन के रूप में मैं खुद अनश्चन में बैठ जाऊं. लेकिन उस स्थिति में नहीं बैठ सकती जब पूरे देश के लोग आगे आ जाए. यही मैं कहना चाहती हूँ.